मुझे आशा है कि आपने इस कहानी का भाग 1 पढ़ लिया है .... तो चलिये देखते हैं कि राम को उसकी अच्छाई और कर्म का क्या फल मिला है .....✍🏻✍🏻✍🏻
जब राम नगर की ओर जा रहा था तो रास्ते में उसे भूख लगी और उसने बंदर को पुकारा, तब बंदर ने राम को मीठे फल दिये
और राम फिर से नगर की तरफ जाने लगा फिर उसे महसूस हुआ कि नगर में उसे धन की जरुरत पडेगी, इसलिये उसने शेर को बुलाया, शेर ने अपने वादे अनुसार उसे धन दे दिया और राम फिर से नगर की तरफ जाने लगा। कुछ ही देर में राम नगर पहुंच गया, तब जिस आदमी की उसने जान बचाई थी, वो राम को राजा के दरबार ले जाता है और राजा के सामने झूठ बोलता है कि राम ने उसका धन चुराया है...
और राजा ने राम को कठोर कारावास की सजा दे दी फिर राम को सांप की याद आई, उसने सांप को पुकारा, और सांप को बोला कि राजा की पुत्री, राजकुमारी को डस ले। सांप के डसने पर राजा ने नगर के सभी हकीमो (doctors) को बुलाया, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ।
राजा ने ऐलान किया कि जो भी राजकुमारी को ठीक करेगा , उसको आधा नगर दिया जाएगा और राजकुमारी से विवाह करवाया जाएगा, तब राम कहता है कि वो राजकुमारी को ठीक कर सकता है , तब राजा राम को राजकुमारी के पास ले जाता है और राम उसी सांप की मदद से राजकुमारी के शरीर से सारा जहर निकाल देता है। राजकुमारी ठीक हो जाती है और राजा अपने वादे को निभाते हुए, राजकुमारी का विवाह राम से कर देता है और उस धूर्त आदमी को आजीवन कठोर कारावास की सजा दी जाती है।
इसलिये कहते हैं 'परोपकार का फल' मीठा होता है। आप कर्म करते रहिये, फल की चिंता न करें ।
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